भारतीय सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संवेदना और संस्कृति को समझने का एक सशक्त माध्यम भी है। भारतीय चित्र साधना द्वारा 22 अगस्त को केशव कुंज में आयोजित फिल्म आस्वादन कार्यक्रम में फिल्म ‘ओह माय डॉग’ का विशेष प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 200 फिल्मप्रेमियों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संस्थाओं के गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की। इनमें सतीश उपाध्याय जी, उपाध्यक्ष, दिल्ली जल बोर्ड; आरती उपाध्याय जी, पशु अधिकार कार्यकर्ता; रोहित मेहरा जी, IRS कमिश्नर, इंटरनेशनल टैक्सेशन; जयवीर राणा जी, चेयरमैन, नजफगढ़ ज़ोन, MCD; रविंदर सोलंकी जी, जिला अध्यक्ष, भाजपा, महरौली जिला; श्रीवर्धन त्रिवेदी जी, वरिष्ठ एंकर ‘सनसनी’, ABP News एवं अभिनेता; डॉ. पंकज श्याम लाथर, कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस एवं डायरेक्टर-PR, DSEU; डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर, चेयरमैन, CCRT; सरिता तोमर जी, सदस्य, NDMC, सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारतीय चित्र साधना के सचिव अतुल गंगवार जी एवं ट्रस्टी रंजना यादव जी भी उपस्थित रहे।
‘ओह माय डॉग’—बेजुबान वफादारी की भावुक कहानी
अमित राय द्वारा निर्देशित ‘ओह माय डॉग’ इंसानों और कुत्तों के बीच के गहरे भावनात्मक रिश्ते को केंद्र में रखती है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि यह कहानी केवल पालतू जानवर और उसके मालिक के रिश्ते तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इंसान और पशु के बीच मौजूद विश्वास, संवेदना, अपनापन और बेजुबान वफादारी को व्यापक रूप से सामने लाती है।
फिल्म में भारतीय आवारा कुत्तों ऑस्कर और मोमो को महत्वपूर्ण भूमिका में प्रस्तुत किया गया है। यह पहल मुख्यधारा के सिनेमा में एक अलग और संवेदनशील दृष्टिकोण सामने रखती है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, माही राय और निखिल कुमार सहित कलाकारों ने अभिनय किया है।
फिल्म की कहानी बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए एक इमोशनल और फील-गुड अनुभव प्रस्तुत करती है। जहां एक ओर फिल्म दर्शकों को पशुओं के प्रति संवेदनशील होने का संदेश देती है, वहीं दूसरी ओर कहानी में शामिल सस्पेंस, थ्रिल और छोटे-छोटे ट्विस्ट दर्शकों को अंत तक जोड़े रखते हैं।
निर्देशक अमित राय से सीधा संवाद
फिल्म के प्रदर्शन के बाद कार्यक्रम का सबसे खास और संवादपूर्ण चरण रहा निर्देशक अमित राय के साथ बातचीत। अमित राय स्वयं कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने फिल्म के निर्माण से जुड़े अपने अनुभव दर्शकों के साथ साझा किए।
उन्होंने बताया कि फिल्म की कल्पना से लेकर उसके निर्माण तक उन्हें किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अमित राय ने फिल्म के निर्माण के दौरान सामने आई विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान से जुड़े कई रोचक प्रसंग भी साझा किए। उनकी बातचीत ने दर्शकों को फिल्म के पर्दे के पीछे की दुनिया को समझने का अवसर दिया।
इसके बाद दर्शकों ने भी निर्देशक से कई सवाल पूछे। प्रश्नोत्तर सत्र में फिल्म की कहानी, कुत्तों के साथ शूटिंग, चरित्र निर्माण, फिल्म के संदेश और निर्माण प्रक्रिया को लेकर दर्शकों की उत्सुकता स्पष्ट दिखाई दी।
फिल्म आस्वादन की सार्थक पहल
भारतीय चित्र साधना का यह आयोजन केवल फिल्म प्रदर्शन तक सीमित नहीं था। इसका उद्देश्य दर्शकों को फिल्म को एक कला, सामाजिक दस्तावेज और विचार-विमर्श के माध्यम के रूप में देखने के लिए प्रेरित करना भी था।
‘ओह माय डॉग’ जैसी फिल्म के माध्यम से पशु-प्रेम, करुणा और इंसान तथा जानवरों के बीच के भावनात्मक संबंध पर संवाद की शुरुआत होना इस कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। लगभग 200 दर्शकों की सहभागिता और फिल्म के बाद हुए जीवंत संवाद ने यह साबित किया कि अच्छी और संवेदनशील फिल्म दर्शकों के मन में सवाल भी पैदा करती है और संवाद की नई संभावनाएं भी खोलती है।
भारतीय चित्र साधना द्वारा आयोजित यह फिल्म प्रशंसा कार्यक्रम इसी भावना को आगे बढ़ाने वाली एक सार्थक पहल रहा, जहां सिनेमा देखा ही नहीं गया, बल्कि समझा, महसूस किया और उस पर संवाद भी किया गया।


